गीतिका/ ग़ज़ल- देखिये कैसा जमाना…

आकाश महेशपुरी

रचनाकार- आकाश महेशपुरी

विधा- गज़ल/गीतिका

गीतिका/ ग़ज़ल- देखिये कैसा जमाना…
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देखिये कैसा जमाना आ गया
हर किसी को दिल दुखाना आ गया
***
था वहाँ मैं मौत की आगोश में
उनको' लेकिन मुस्कुराना आ गया
***
मुझको' तेरी बस इसी तस्वीर से
आजकल है दिल लगाना आ गया
***
हर किसी को है पड़ी अपनी मगर
और पर आँसू बहाना आ गया
***
आ गया शमशान के नजदीक मैं
यूँ लगा जैसे ठिकाना आ गया
***
मैं चला 'आकाश' रब को ढूंढने
पर किसी के काम आना आ गया

– आकाश महेशपुरी

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आकाश महेशपुरी
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पूरा नाम- वकील कुशवाहा "आकाश महेशपुरी" जन्म- 20-04-1980 पेशा- शिक्षक रुचि- काव्य लेखन

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