गीतिका- हँसना तो एक बहाना है

आकाश महेशपुरी

रचनाकार- आकाश महेशपुरी

विधा- गज़ल/गीतिका

गीतिका- हँसना तो एक बहाना है
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हँसना तो एक बहाना है।
गम का भी इधर खजाना है।।
०००
क्यूँ बैठा हूँ आस लगाए,
किसका ये हुआ जमाना है।
०००
है चाहत मिल जाये दुनिया,
पर दुनिया से ही जाना है।
०००
आखिर कितना दर्द सहेंगे,
कुछ इसका भी पैमाना है।
०००
है जितना नजरों में पानी,
बस अपनों का नजराना है।
०००
कितना भी "आकाश" उड़ो तुम,
इस धरती पर ही आना है।

– आकाश महेशपुरी

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आकाश महेशपुरी
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पूरा नाम- वकील कुशवाहा "आकाश महेशपुरी" जन्म- 20-04-1980 पेशा- शिक्षक रुचि- काव्य लेखन

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