गीतिका छंद

Neelam Naveen

रचनाकार- Neelam Naveen "Neel"

विधा- गज़ल/गीतिका

नील गगन धरणी तक,सूर्य चन्द्र मीत से
तम  विलय उजास में,पुष्प रंगों में खिले ।

प्रकाशमय प्रकाशमय, वे कर्मवीर बढ़ रहे
पतन के विनाश को अब,आगाज वे कर रहे।

क्षूद्र जैसे भाव का, जो आज नाश हो रहा
युगो के परिहास में, विनाश तंत्र रो रहा ।

नव लहू में जो जोश है, मूल्य बीज बो रहा
अहो भाग्य आज हैं,  देश फिर संवर रहा ।

नयी नयी पौध संग, कहीं तम द्वेष घट रहा
प्रेम समृद्ध सदभाव में, प्रकाश पुंज बढ़ रहा !!!!
  
नीलम नवीन "नील"
देहरादून 28/1/17

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Neelam Naveen
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शिक्षा : पोस्ट ग्रेजूऐट अंग्रेजी साहित्य तथा सोसियल वर्क में । कृति: सांझा संकलन (काव्य रचनाएँ ),अखंड भारत पत्रिका (काव्य रचनाएँ एवं लेख ) तथा अन्य पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित । स्थान : अल्मोडा

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