गाओ यार गीत वर्षा के !!!

हरीश लोहुमी

रचनाकार- हरीश लोहुमी

विधा- गीत

गाओ यार गीत वर्षा के !!!
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हरा-भरा है कोना-कोना,
छोडो अब सूखे का रोना,
हरियाली की गोद में जाके,
गाओ यार गीत वर्षा के ।

आओ हिल-मिल झूला झूलें,
पेंग बढाये,नभ को छू लें ,
तारे- चाँद जमी पे लाके,
गाओ यार गीत वर्षा के ।

माँ जी झट से चाय बनाओ,
मुन्नी गरम पकौडे लाओ,
पीकर चाय पकौडे खाके,
गाओ यार गीत वर्षा के ।

वर्षा रानी की मनमानी,
इसने कुछ करने की ठानी,
इसको अपने अंग लगा के,
गाओ यार गीत वर्षा के ।

***** हरीश चन्द्र लोहुमी

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हरीश लोहुमी
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कविता क्या होती है, नहीं जानता हूँ । कुछ लिखने की चेष्टा करता हूँ तो फँसता ही चला जाता हूँ । फिर सोचता हूँ - "शायद यही कविता हो जो मुझे रास न आ रही हो" . कुछ सामान्य होने का प्रयास करता हूँ, परन्तु हारे हुए जुआरी की तरह पुनः इस चक्रव्यूह में फँसने का जी करता है ।

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2 comments
  1. वाह्ह्ह्ह्ह्ह् रिमझिम बरखा में रिमझिम बरखा का गीत ।बहुत सुन्दर ।