गाँव-चौबारे पर खेल—कविता—डी. के. निवातियाँ

डी. के. निवातिया

रचनाकार- डी. के. निवातिया

विधा- कविता

नन्हे मुन्ने खेल रहे थे, गाँव – चौबारे पर खेल
हाथ में लिये हाथ दूजे का, वो बना रहे थे रेल !!

कोई सिपाही बन कर ऐंठे
कोई चोर बन घबराये
बाकी प्रजा की भूमिका में
इकट्ठे मांग रहे न्याय !!

खेल खेल में उनको आया याद
खेले भारत हुआ कैसे आजाद
कैसे लड़ी थी लड़ाई पुरखो ने
आओ संग मिलकर करे याद !!

देखक्रर बच्चो के ओज भाव
बुजुर्गो में भी जागी जिज्ञासा
दूर बैठकर वो भी लगे देखने
बच्चो के करतब का तामाशा !!

कोई बोले मैं अशफाक बनूँगा
एक कहे, मैं हूँ वीर सावरकर
बिस्मिल बन कर भरी हुंकार
लड़ूंगा मैं भगत सिंह बनकर !!

अलग अलग है भाषा – भाषी
भिन्न भले अपना खान पान
कश्मीर से कन्याकुमारी तक
एकता की हम जग में मिसाल !!

एक बस्ती में संग-२ रहते है
हिन्दू मुस्लिम, सिख ईसाई
कोई नहीं है भेदभाव हम में
सब कहते एक दूजे को भाई !!

एक चमन के ये फूल है सारे
रंग रूप भले हो अपने न्यारे
बगिया तो तब ही सजती है
जब पुष्प खिले न्यारे प्यारे !!

इन बच्चो ने फिर याद दिलाया
मेरा भारत है दुनिया से निराला
मजहब सिखलाते तहजीब यंहा
जर्रा जर्रा जिसका हमको प्यारा !!

कुछ बच्चो के नाम गिना दूँ
निक्कू, दक्ष और हर्ष बता दूँ
‘सार्थक’ हो रचना ‘ख़ुशी’ से
भाव समर्पण मैं इन्हें करा दूँ !!

नन्हे मुन्ने खेल रहे थे, गाँव – चौबारे पर खेल
हाथ में लिये हाथ दूजे का, वो बना रहे थे रेल !!

!
!
!

रचनाकार ::—> डी. के. निवातियाँ____@@@

♣♣♣♣♣♣♣♣♣♣♣♣

Views 81
Sponsored
Author
डी. के. निवातिया
Posts 148
Total Views 14.7k
नाम: डी. के. निवातिया पिता का नाम : श्री जयप्रकाश जन्म स्थान : मेरठ , उत्तर प्रदेश (भारत) शिक्षा: एम. ए., बी.एड. रूचि :- लेखन एव पाठन कार्य समस्त कवियों, लेखको एवं पाठको के द्वारा प्राप्त टिप्पणी एव सुझावों का ह्रदय से आभारी तथा प्रतिक्रियाओ का आकांक्षी । आप मुझ से जुड़ने एवं मेरे विचारो के लिए ट्वीटर हैंडल @nivatiya_dk पर फॉलो कर सकते है. मेल आई डी. dknivatiya@gmail.com
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia