ग़ुजरा साल पुराना

ईश्वर दयाल गोस्वामी

रचनाकार- ईश्वर दयाल गोस्वामी

विधा- गीत

नई-नई सौगातें देकर,
ग़ुजरा साल पुराना ।

नोटों को भी बंद करा कर ,
बाजारों को मंद करा कर ।
नयी व्यवस्था की कोशिश में,
तुगलकी फ़रमान दिला कर ।
हट्टे – कट्टे सैनिक लेकर ,
ग़ुजरा साल पुराना ।

काले को भी श्वेत बनाकर,
और श्वेत को काला करके ।
बैंकों में लाइन लगवाकर ,
जीजा को भी साला करके ।
मँहगाई का थप्पड़ देकर,
ग़ुजरा साल पुराना ।

पल भी ग़ुजरे,क्षण भी ग़ुजरे,
ग़ुजर गए घंटे और दिन भी ।
लंबी – लंबी रातें ग़ुजरीं ,
करवट बदली, दुनियाँ बदली।
अच्छे दिन का झाँसा देकर,
ग़ुजरा साल पुराना ।

फिर भी मित्रो, चले-चलो तुम,
आगे-आगे , बढ़े चलो तुम ।
आशाओं की पगडंडी पर ,
पग बस अपने धरे चलो तुम ।
खट्टे-मीठे अनुभव देकर ,
बनता समय सुहाना ।

ईश्वर दयाल गोस्वामी ।
कवि एवम् शिक्षक ।

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ईश्वर दयाल गोस्वामी
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-ईश्वर दयाल गोस्वामी कवि एवं शिक्षक , भागवत कथा वाचक जन्म-तिथि - 05 - 02 - 1971 जन्म-स्थान - रहली स्थायी पता- ग्राम पोस्ट-छिरारी,तहसील-. रहली जिला-सागर (मध्य-प्रदेश) पिन-कोड- 470-227 मोवा.नंबर-08463884927 हिन्दीबुंदेली मे गत 25वर्ष से काव्य रचना । कविताएँ समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में प्रकाशित । रुचियाँ-काव्य रचना,अभिनय,चित्रकला । पुरस्कार - समकालीन कविता के लिए राज्य शिक्षा केन्द्र भोपाल द्वारा 2013 में राज्य स्तरीय पुरस्कार । नेशनल बुक ट्रस्ट नई दिल्ली द्वारा रमेशदत्त दुबे युवा कवि सम्मान 2015 ।
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