ग़मों की दुनियाा तलाश लोगे बुरा करोगे

Salib Chandiyanvi

रचनाकार- Salib Chandiyanvi

विधा- गज़ल/गीतिका

ग़मों की दुनिया तलाश लोगे बुरा करोगे
सभी से ख़ुद को जुदा करोगे बुरा करोगे

बुरा करोगे जो चुप रहोगे ..दुखों पे अपने
किसी से मेरे सिवा कहोगे….. बुरा करोगे

ग़ज़ब करोगे मसल के फूलों को ऐडियों से
कि खुश्बुओं से………… गिला करोगे बुरा

गुरूब होने की ठान ली है जो दिल में तुमने
तुलूअ होने से भी ………..डरोगे बुरा करोगे

अगर मिलोगे किसी से सालिब सिवा हमारे
यक़ीन जानो बुरा करोगे ……….बुरा करोगे

Sponsored
Views 17
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Salib Chandiyanvi
Posts 26
Total Views 282
मेरा नाम मुहम्मद आरिफ़ ख़ां हैं मैं जिला बुलन्दशहर के ग्राम चन्दियाना का रहने वाला हूं जाॅब के सिलसिले में भटकता हुआ हापुड आ गया और यहीं का होकर रह गया! सही सही याद नहीं पर 18/20की आयु से शायरी कर रहा हूँ ! उस्ताद तालिब मुशीरी साहब का शाग्रिद हूँ पर ज्यादा तर मैने फेस बुक से सीखा जिसमें मनोज बेताब साहब, कुंवर कुसुमेश साहब, मुख्तार तिलहरी साहब का बहुत बडा हाथ है !

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia