“ग़ज़ल “

राजेश

रचनाकार- राजेश"ललित" शर्मा

विधा- गज़ल/गीतिका

दो पल संजो कर रख लिये थे; तुम्हारी याद के।
आये तुम उनको उठा कर चले गये।।

वक़्त ने फाहा रखा था ज़ख़्म पे।
आये तुम बस खुरच कर चले गये।।

यूं तो बैठे महफ़िल में हम साथ थे।
गये तुम तो फ़ासले दिखा कर चले गये।।

न जाने किस वजह रुसवा हुये।
आये तुम सबको वजह बता कर चले गये।।
राजेश"ललित"शर्मा

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राजेश
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मैंने हिंदी को अपनी माँ की वजह से अपनाया,वह हिंदी अध्यापिका थीं।हिंदी साहित्य के प्रति उनकी रुचि ने मुझे प्रेरणा दी।मैंने लगभग सभी विश्व के और भारत के मूर्धन्य साहित्यकारों को पढ़ा और अचानक ही एक दिन भाव उमड़े और कच्ची उम्र की कविता निकली।वह सिलसिला आज तक अनवरत चल रहा है।कुछ समय के लिये थोड़ा धीमा हुआ पर रुका नहीं।अब सक्रिय हूँ ,नियमित रुप से लिख रहा हूँ।जब तक मन में भाव नहीं उमड़ते और मथे नहीं जाते तब तक मैं उन्हें शब्द नहीं दे पाता। लेखन :- राजेश"ललित"शर्मा रचनाधर्म:-पाँचजन्य में प्रकाशित "लाशों के ढेर पर"।"माटी की महक" काव्य संग्रह में प्रकाशित।

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