ग़ज़ल होती है

संजय सिंह

रचनाकार- संजय सिंह "सलिल"

विधा- गज़ल/गीतिका

खो के सब कुछ भी मिले जो वो ग़ज़ल होती है l
नींद आंखों से उड़ा दो तो गजल होती है ll

लोग शब्दों से बयां करते जज्बातों को l
दर्द लफ़्ज़ों में जो ढालो तो ग़ज़ल होती है ll

तीर तरकश से चलेगा तो निशाना होगा l
जो निशाना खुद ही बनो तो गजल होती है ll

आने दो आने गुजर जाता ए जीवन अपना l
जेब खाली जो मिले वो तो गजल होती है ll

खून जलता हो जुबा चुप हो "सलिल" तो पक्का l
मान अपना जो बचाओ तो गजल होती है ll

संजय सिंह "सलिल"
प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश l

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संजय सिंह
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मैं ,स्थान प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश मे, सिविल इंजीनियर हूं, लिखना मेरा शौक है l गजल,दोहा,सोरठा, कुंडलिया, कविता, मुक्तक इत्यादि विधा मे रचनाएं लिख रहा हूं l सितंबर 2016 से सोशल मीडिया पर हूं I मंच पर काव्य पाठ तथा मंच संचालन का शौक है l email-- sanjay6966@gmail.com, whatsapp +917800366532

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