ग़ज़ल :– बंदिश ये रंजिश औ नाकाम से डर जाते हैं ॥

Anuj Tiwari

रचनाकार- Anuj Tiwari "इन्दवार"

विधा- गज़ल/गीतिका

गज़ल :– बंदिश ये रंजिश औ नाकाम से डर जाते हैं ॥
बहर :–
2212–2212–212–2212

बंदिश ये रंजिश और नाकाम से डर जाते हैं ।
रिश्ते न हो जाए ये नीलाम से डर जाते हैं ।

मयखानों में बैठे तो हम जाम से डर जाते हैं ।
पी कर के हम तो उसके अंजाम से डर जाते हैं ।

लगता है डर जालिम ज़माने की बेहयाओ से ।
जब बेअदायी हो तो ईमाम से डर जाते हैं ।

मुस्कान की चाहत में गुमनाम है ये ज़िंदगी ।
क्यों आज हम अपने ही हर काम से डर जाते हैं।

घायल हुए हालात , अक्सर दगा के वार से ।
ईमान पे हम जीते अस्काम से डर जाते हैं ।

नाबूद इन्तीकाम से हो गया हर शक्स जो ।
डरते फिदा से थे जो , इंतिकाम से डर जाते हैं ।

Views 53
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Anuj Tiwari
Posts 107
Total Views 16.5k
नाम - अनुज तिवारी "इन्दवार" पता - इंदवार , उमरिया : मध्य-प्रदेश लेखन--- ग़ज़ल , गीत ,नवगीत ,कविता , हाइकु ,कव्वाली , तेवारी आदि चेतना मध्य-प्रदेश द्वारा चेतना सम्मान (20 फरवरी 2016) शिक्षण -- मेकेनिकल इन्जीनियरिंग व्यवसाय -- नौकरी मोबाइल नम्बर --9158688418 anujtiwari.jbp@gmail.com

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia