गहना : मुक्तक

दिनेश एल०

रचनाकार- दिनेश एल० "जैहिंद"

विधा- मुक्तक

गहना
// दिनेश एल० "जैहिंद"

एक गहना आपका एक गहना शर्मो लाज का ।।
एक गहना दिव्य द्रव्य का एक सज्जो साज का ।।
लग गई जो दाग तन पर गए मान ओ सम्मान,,
सारी सुंदरता और सिंगार नहीं किसी काज का ।।

पर्दा भी एक गहना है कर लो इस पर भी विचार ।।
पर्दे में भी रख पर्दा करे तब संपूर्ण जगत् व्यवहार ।।
सारे गहनों संग पर्दे को भी मिले उचित सम्मान,,
गुलशन-सा तब महक उठेगा नर-नारी – घर-बार ।।

गहना में है गुथा गहन विचार ऋषियों का ।।
गहना में गड़ा गहरा आचार मनीषियों का ।।
गहना है कवच स्वाभिमान और चरित्रों का,,
गहना है गजब गरिमा हर नर-नारियों का ।।

गहनों से ना कभी मुँह फेरना ।।
बचाकर रखना अपना गहना ।।
गहना है “जैहिंद” तन का गहना,,
गहनों का रिश्ता तन से बहना ।।।

=== मौलिक ====
दिनेश एल० “जैहिंद”
07. 07. 2017

Views 3
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
दिनेश एल०
Posts 84
Total Views 815
मैं (दिनेश एल० "जैहिंद") ग्राम- जैथर, डाक - मशरक, जिला- छपरा (बिहार) का निवासी हूँ | मेरी शिक्षा-दीक्षा पश्चिम बंगाल में हुई है | विद्यार्थी-जीवन से ही साहित्य में रूचि होने के कारण आगे चलकर साहित्य-लेखन काे अपने जीवन का अंग बना लिया और निरंतर कुछ न कुछ लिखते रहने की एक आदत-सी बन गई | फिर इस तरह से लेखन का एक लम्बा कारवाँ गुजर चुका है | लगभग १० वर्षों तक बतौर गीतकार फिल्मों मे भी संघर्ष कर चुका,,

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia