गये विरोधी काँप

RAMESH SHARMA

रचनाकार- RAMESH SHARMA

विधा- दोहे

मंजर देख बिहार का,गये विरोधी काँप !
छाती पर ऐसे लगा,.लोट गया हो साँप !!

मिले दवाई दंश की,सहज सर्प की आज!
काटे का इंसान के , लेकिन नही इलाज !

मुझसे भी ज्यादा जहर,उगल रहा इंसान!
यही सोचकर हो रहा, विषधर भी हैरान !!
रमेॆश शर्मा.

Views 9
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
RAMESH SHARMA
Posts 167
Total Views 2.6k
अपने जीवन काल में, करो काम ये नेक ! जन्मदिवस पर स्वयं के,वृक्ष लगाओ एक !! रमेश शर्मा

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia