गमो का बोझ

Raj Vig

रचनाकार- Raj Vig

विधा- कविता

गमो का बोझ जब
दिल से उठाया न गया
आंखों से अश्कों का राज़
भी छुपाया न गया ।

दर्दे दिल चाह कर भी
किसी को बताया न गया
जख्म दिया था जिसने
नाम उसका जुबां पे लाया न गया ।

रोशनी प्यार की कम थी
बुझते दीयों को जलाया न गया
कसूर शायद हमारा ही था
जो वादा हमसे निभाया न गया ।

गुजरा नही रूठा था कोई
आवाज दे के वापस बुलाया न गया
जिन्दगी रोज गुजरती रही
अहं हमसे दबाया न गया ।।

राज विग

Views 78
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Raj Vig
Posts 38
Total Views 2k

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia