गद्य था मैं तुम मिली तो पद्य आया

PAWAN TIWARI

रचनाकार- PAWAN TIWARI

विधा- गीत

दुःख था इतना मृत्यु के मंजर दिखे
तुमको सोंचा जीने के फिर घर दिखे
जब उदासी घेर लेती है मुझे
मुझे बुलाते तब तुम्हारे कर दिखे

प्यार की बातें कभी जब होती हैं
तब तुम्हारी यादें दिल में होती हैं
जब कभी थोड़ा हताश हो जाता हूँ
तुम्हें करके याद फिर ताज़ा हो जाता हूँ

गद्य था मैं तुम मिली तो पद्य आया
साथ जो तुम चल पड़ी तो गीत गाया
तुमने जो अंकन किया तो रोम पुलकित हो गये
प्रणय का संगीत सुनकर,अधर फिर से गुनगुनाया

तुम जो आ जाती हो तो फिर क्या कहूँ
दीप भी बुझता नहीं,मेरी भला मैं क्या कहूँ
मैं क्या सोऊँ,नीद भी सोती नहीं
रात भी तुमको निहारे,सोये ना मैं क्या कहूँ

जिन्दगी से हारने के जब मुझे लक्षण दिखे
जीतने के आख़िरी तब शस्त्र केवल तुम दिखे
तुम जो आये साथ मेरे हृदय पुष्पित हो गया
सारे लक्षण जिन्दगी से जीतने के तब दिखे

पवन तिवारी
सम्पर्क – 7718080978
poetpawan50@gmail.com

Sponsored
Views 7
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
PAWAN TIWARI
Posts 3
Total Views 20
परिचय पवन चिंतामणि तिवारी जन्म-अम्बेडकरनगर ,उत्तर प्रदेश, शिक्षा - स्नातक एवं हिन्दी में ''साहित्यरत्न''.गत 19 वर्षों से मुंबई में निवास.12 वर्ष की उम्र से लेखन , तमाम पत्र- पत्रिकाओं का सम्पादन किया. आकाशवाणी से अनेक कार्यक्रम प्रसारित, एक उपन्यास ,एक कहानी संग्रह ,प्रकाशित, लेखक ,पत्रकार, वक्ता, शोध कर्ता,हिन्दी सेवी

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia