गणेश जी की स्तुति

साहेबलाल 'सरल'

रचनाकार- साहेबलाल 'सरल'

विधा- मुक्तक

पान फूल मेवा जो चढ़ावें गणपति जी को
मन की मुरादें फिर मनचाही पाया है।।

अंधन को आँख देवे कोढ़िन को काया जो
बाँझन को पुत्र देवे निरधन को माया है।।

ध्यान धरता है जो मन में गणेश का
घर परिवार सुखी सुखी रहे काया है।।

सिद्ध करे काज और दीनन की लाज रखे
जय गणेश आरती को आपने जो गाया है।।

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साहेबलाल 'सरल'
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संक्षेप परिचय *अभिव्यक्ति भावों की" कविता संग्रह का प्रकाशन सन 2011 *'रानी अवंती बाई की वीरगाथा' की आडियो का विभिन्न मंचो में प्रयोग। *'शौचालय बनवा लो' गीत की ऑडियो रिकार्डिंग बेहद चर्चित। *अनेको रचनाएं देश की नामचीन पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित। *छंद विधान के कवि के रूप में देश के विभिन्न अखिल भारतीय मंचो पर स्थान। *संपर्क नम्बर-8989800500, 7000432167

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