** गजल **

पूनम झा

रचनाकार- पूनम झा

विधा- गज़ल/गीतिका

बहते थे अश्क जो तेरा प्यार पाने के लिए ।
रोक दिया उसे लबों को मुस्कुराने के लिए ।
*
समन्दर तो अभी भी है तूफान समेटे हुए पर
हिदायत है आँखों का सैलाब न बनने के लिए ।
*
ये होंठ हैं दगाबाज कभी भी हंसा देते हैं पर
सिमट जाता आंसू आँखों में छिपने के लिए ।
*
जब कतरा कतरा दर्द रिसता है इस दिल से
फिर बेताब हो जाता है आंसू बहने के लिए ।
*
ये वफादार आँखें बाहें फैलाये खड़े रहते हैं
अपनी आगोश में अश्क को समेटने के लिए ।
*
आंसू में डूबकर भी देखा है हमने जमाने को
अपने भी साथ छोड़ देते हैं डूब जाने के लिए ।
*
अश्क बहाने से कुछ नहीं मिलता है " पूनम "
इजाजत दो खुद को ही राह दिखाने के लिए ।
@पूनम झा
कोटा राजस्थान

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पूनम झा
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मैं पूनम झा कोटा,राजस्थान (जन्मस्थान: मधुबनी,बिहार) से । सामने दिखती हुई सच्चाई के प्रति मेरे मन में जो भाव आते हैं उसे शब्दों में पिरोती हूँ और यही शब्दों की माला रचना के कई रूपों में उभर कर आती है। मैं ब्लॉग भी लिखती हूँ | इसका श्रेय मेरी प्यारी बेटी को जाता है । उसी ने मुझे ब्लॉग लिखने को उत्प्रेरित किया। कभी कभी पत्रिकाओं में मेरी रचना प्रकाशित होती रहती है | ब्लॉग- mannkibhasha.blogspot.com

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