गजल

Vandaana Goyal

रचनाकार- Vandaana Goyal

विधा- गज़ल/गीतिका

गजल
कौन यादों में यूँ बसी सी है
क्यों निगाहों में खलबली सी है

चांदनी पूछती दरिंचो से
रात दुल्हन सी क्यों सजी सी है

रोक लेता पकड़ तिरा आंचल
पर मुहब्बत में कुछ कमी सी है

जानता भी नहीं मनाना मैं
और वो है कि बस रुठी सी है

आइना रख गया कुई सामने
आंख में फिर वही नमी सी है

हो रही हलचलें गुलिस्तां में
बेअदब इक हवा चली सी है

आप कहिए उसे सुनेगी वो
यार यूं दिल की वो भली सी है

कर न बंद खिड़कियां दिल की
धडकनें कुछ चली चली सी है
वंदना मोदी गोयल

Views 26
Sponsored
Author
Vandaana Goyal
Posts 16
Total Views 2.6k
बंदना मोदी गोयल प्रकाशित उपन्यास हिमखंड छठा पूत सांझा काव्य संग्रह,कथा संग्रह राष्टीय पञ पत्रिकाओं में कविता कथा कहानी लेखों प्रकाशन मंच पर काव्य प्रस्तुति निवास फरीदाबाद
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia