गजल ….

पूनम झा

रचनाकार- पूनम झा

विधा- गज़ल/गीतिका

वक्त ………
दिया दर्द वो, पर प्यार बेहिसाब माँगता है।
दिया नहीं कभी कुछ, पर हिसाब माँगता है।
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भरोसे को भी उसपर भरोसा करने का भरोसा
नहीं पर वो है कि भरोसे का जवाब माँगता है ।
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बह गई जिंदगी यूं ही दरिया में सूखे पत्ते की
तरह पर वो जिंदगी का किताब माँगता है।
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लुढ़कती घिसटती जैसे तैसे कटती गई जिंदगी
वो तो खुशनुमा जिंदगी का खिताब माँगता है।
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काँटों से मुखातिब रहे देखा नहीं नरमियों को
पर वो है कि महकता हुआ गुलाब माँगता है।
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वक्त ठहरता नहीं कभी, यूं ही गुजरता जाता है
जीवन संघर्ष है "पूनम" बस आदाब मांगता है।
@पूनम झा। कोटा, राजस्थान
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पूनम झा
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मैं पूनम झा कोटा,राजस्थान (जन्मस्थान: मधुबनी,बिहार) से । सामने दिखती हुई सच्चाई के प्रति मेरे मन में जो भाव आते हैं उसे शब्दों में पिरोती हूँ और यही शब्दों की माला रचना के कई रूपों में उभर कर आती है। मैं ब्लॉग भी लिखती हूँ | इसका श्रेय मेरी प्यारी बेटी को जाता है । उसी ने मुझे ब्लॉग लिखने को उत्प्रेरित किया। कभी कभी पत्रिकाओं में मेरी रचना प्रकाशित होती रहती है | ब्लॉग- mannkibhasha.blogspot.com

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