गजल

रजनी मलिक

रचनाकार- रजनी मलिक

विधा- गज़ल/गीतिका

"किसी दिन सामने सच बनके आओ।
कभी तुम ख्वाबों के चिलमन हटाओ।
धड़कती है हवाओं में मुहब्बत,
हमारी दास्ताँ उनको सुनाओ।
निकल पाते नहीं जो खुद से बाहर,
है कुछ रूठे हुए उनको हंसाओं।
सुना हर पल बदलती गर्दिशे है,
हमें वो तारों की भाषा बताओ।
भटकती संग है राही के गलियाँ,
उन्हें भी तुम कोई रहबर सुझाओ।
"कभी बंजर न हो दिल की जमी ये,
इन आँखों में नमी तो छोड़ जाओ।
रजनी

Views 37
Sponsored
Author
रजनी मलिक
Posts 29
Total Views 2k
योग्यता-M.sc (maths) संगीत;लेखन, साहित्य में विशेष रूचि "मुझे उन शब्दों की तलाश है;जो सिर्फ मेरे हो।"
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia