गजल : 💝💝सुंदर ये प्रेम अनुपम💝💝

Radhey shyam Pritam

रचनाकार- Radhey shyam Pritam

विधा- गज़ल/गीतिका

अपना प्यार धरा -अंबर -सा सुन! रानी।
दूर क्षितिज पर मिलता होकर तूफानी।।

हम तुम एक सिक्के के दो पहलूँ हैं।
सजती है मिलकर दोनों की जवानी।।

रब सबकी जिंदगी में प्रेम यौवन भरे।
मधुबन -सी हो जाए सजके जिंदगानी।।

लेकर मधुर गीत मिलें हम दोनों सनम।
प्यार में हो जाएंगी मौजें फिर सुहानी।।

सावन -घन -सा प्रेम बरसे हरपल अपना।
हो जाएगी जीवन की हर रुत मस्तानी।।

कल -कल बहते झरने -सम निर्मल प्रेम।
फूले -फले बन जाए एकदिन विश्वबानी।।

राग प्रेम का सुंदर सुघर पावन बनेगा।
तेरा मेरा न रहे यहाँ कोई फिर सानी।।

प्रीत की गली में लाखों रंग उडते हैं।
होता मन इन्द्रधनुषी उमंगे भर नूरानी।।

पारस प्रेम तन सोने को है चमकाता।
जिसे देखकर दुनिया हो जाती दीवानी।।

"प्रीतम" मोहब्बत तो नशीब से मिलती है।
जिसमें जन्नत की महक है सुन अंजानी।।
……..राधेयश्याम बंगालिया"प्रीतम"
💝💝💝💝💝💝💝💝💝💝💝💝

Views 27
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Radhey shyam Pritam
Posts 150
Total Views 7.3k

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia