गजल: 💝•अपनी गलतियों से…💝

Radhey shyam Pritam

रचनाकार- Radhey shyam Pritam

विधा- गज़ल/गीतिका

अपनी गलतियों से हर वक्त सीखता हूँ।
दूसरों की आलोचना पर स्वस्थ रहता हूँ।।

असफल वही होते हैं जो परीक्षा देते हैं।
नदारद की गिनती मैं कभी नहीं करता हूँ।।

चलोगे तो फिसलोगे कभी गिरोगे भी तुम।
ऐसो के लिए उठने की मैं प्रेरणा बनता हूँ।।

रणवीर रण में ही अपना कौशल दिखाते हैं।
अपने मुँह मिया मिट्ठू को वीर नहीं कहता हूँ।।

कोशिशें करें,गिर कर संभलें सच्चे सिपाही।
हिम्मत न हारने वालों की तारीफें करता हूँ।।

पर्वत चढने वाले तो झुककर ही चढते हैं।
सीधा चलने वालों को तो जमीं पर देखता हूँ।।

मेरा फलसफा है इस हाथ दे उस हाथ ले।
ऐसे बंदों में मैं व्यवहार का तजुर्बा ढूँढता हूँ।।

प्रभु को देखना तो गरीबों की आँखों में है।
अमीरों की आँखों में लालची शैतान देखता हूँ।।

तृष्णा तो धोखा है,माया है सुनले बंधु मेरे।
आवश्यकता में सादगी का जज्बा मानता हूँ।।

बुत
को पूजने से भगवान नहीं मिलता कभी।
नेक कर्मों के हौंसलों में भगवान देखता हूँ।।

💝प्रीतम💝प्रीत इंसानियत से कर इंसान से नहीं।
इंसान को रोज गिरगिट-सा बदलता देखता हूँ।।

……💝💝राधेयश्याम प्रीतम💝💝
…………👏👏👏👏👏👏

Views 28
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Radhey shyam Pritam
Posts 150
Total Views 7.3k

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia