💝💝◆सैनिक का धर्म◆💝💝

Radhey shyam Pritam

रचनाकार- Radhey shyam Pritam

विधा- कविता

सैनिक हो चाहे किसी देश का भी।
इंसान पहले है किसी वेश का भी।।

आमने-सामने लडना तो फर्ज ठहरा।
शहीद होने पर मान सर्वेश का भी।।

अंग-भंग करना कोई तालिम नहीं है।
विरोध हो ऐसी बर्बरता आदेश का भी।।

पार्थिव शरीर से छेड शैतानियत होती।
हर धर्म ये सिखाए अखिलेश का भी।।

युद्ध सदा ही घाटे का सौदा,न करो।
प्रेम,सौहार्द में आनंद नीलेश का भी।।

आज मेरा कल तेरा सिर कटेगा ऐसे।
हर रिस्ता रोयेगा पीछे सुदेश का भी।।

शांति,अमन का पाठ पढो पढाओ रे!
प्यार से महके कोना परिवेश का भी।।

आने वाली नसलें सुख की साँस लें।
स्वर्ग हो जाए भूलोक जनेश का भी।।

हिन्दू,मुस्लिम एक नूर से उपजे तुम।
शत्रु बन न तोडो नेम लोकेश का भी।।

दिलों की दुरियां कम करो वक्त रहते।
वरना मिटो,न बचे निशां कलेश का भी।।

"प्रीतम"कब उद्दार होगी ये इंसानी रूह?
जब देखेगी तांडव भूपर महेश का भी।।
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राधेयश्याम….बंगालिया….प्रीतम….कृत

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