गजल :सीख ले ले यार

Radhey shyam Pritam

रचनाकार- Radhey shyam Pritam

विधा- गज़ल/गीतिका

इंसान ज्यादा इंसानियत कम देखी है।
मजे से अपनों ने आँख नम देखी है।।

दूँ किसके प्यार की दुहाई यहाँ दोस्त!
हर किसी की टूटती कसम देखी है।।

विश्वाश दिया वही मौन हुए वक्त पर।
मरी आत्मा उनकी हरकदम देखी है।।

उम्मीद की चादर तब छोटी लगी जब।
इंसानी नीयत इंसान पर बेरहम देखी है।।

ऊपर से हर चीज नीचे गिरती है यार।
ज्वार की भाटे में यही इल्म देखी है।।

गिरगिट न बन तू मौसम न बन कभी।
मिट जाएगा सुन मैंने पूर्णिम देखी है।।

धूप-छाँव-सी यहाँ जिन्दगी की फितरत्।
पल-पल बदलती यहाँ हर रस्म देखी है।।

गुमान न कर सूरत पर इतना कामिनी।
वक्ते-पानी से बुझती शै गरम देखी है।।

नफरत भूल ये दुनिया रंगीन हो जाएगी।
प्यार में आइने की रुह नरम देखी है।।

"प्रीतम"हँसकर हर किसी को गले लगाले।
प्यार में हीरे-सी चमक असीम देखी है।।
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राधेयश्याम….बंगालिया….प्रीतम….कृत
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Radhey shyam Pritam
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