गजल…शान तिरंगे की

Radhey shyam Pritam

रचनाकार- Radhey shyam Pritam

विधा- गज़ल/गीतिका

दिल में बसा ली है हमने,अरे शान तिरंगे की।
तन मन तिरंगे का है ये,है ये जान तिरंगे की।।

चमन है ये वतन हमारा,हम माली बने इसके।
खिलता महकता रहे सदा,झूमे आन तिरंगे की।

किसकी मजाल देखे इसे,आँखें उठा गैरत से।
मिट्टी में मिला दें उसको,हम जुबान तिरंगे की।।

जिसने झुकाना चाहा है,चारों खाने चित हुआ।
जग कोने-कोने फहरती,ये उडान तिरंगे की।।

ओज हरियाली शांति का,संदेश देता सबको।
संत-सी शोभा है जग में,इस महान तिरंगे की।।

हरपल जीवन का कुर्बान,करके मिली आजादी।
खोने न देंगे इसको हम,ये जहान तिरंगे की।।

एकदिन शहीदों का नहीं,हरदिन होना चाहिए।
भरलो बनाके शरगम ये,छेड़ तान तिरंगे की।।

जाति धर्म क्षेत्र भूलो अब,मानवता दिल में भरो।
आपसी प्यार से फलेगी,सुनो बान तिरंगे की।।

रिश्ते-नाते भेंट चढाके,आजादी मिली हमको।
जान पर खेल बचाई है,ये मुस्कान तिरंगे की।।

"प्रीतम"प्रीत सदा वतन से,रखना दिल में बसाकर।
देश सेवा सबसे बढकर,यही गुमान तिरंगे की।।
……….राधेयश्याम बंगालिया"प्रीतम"

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