गजल : माँ ममता की मूरत……….👌👌👌

Radhey shyam Pritam

रचनाकार- Radhey shyam Pritam

विधा- गज़ल/गीतिका

माँ ममता की मूरत है,माँ देवी का अवतार यहाँ।
कलेजे के टुकडे को करती है बहुत प्यार यहाँ।।

माँ का हृदय गंगाजल,प्यार है अमृत की धारा।
खुद सोये गीले में बेटे को देती सूखा संसार यहाँ।।

बेटा जाए प्रदेश में तो माँ को चिंता बहुत सताए।
बिन बेटे के हृदय खलता रहता घर-संसार यहाँ।।

पूत कपूत हो जाए पर माँ की ममता न मिटती।
माँ करुणा की देवी बन देती सुखों का सार यहाँ।।

माँ का हृदय गहरा सागर,चित हिमालय-सा विशाल।
बेटे की गलती पल में भूले,शरारत दे नक्कार यहाँ।।

खुद भूखी रहले चाहे औलाद का पेट पर भरती।
हर कुर्बानी को तत्पर रहती,सहती सब खार यहाँ।।

माँ के प्यार की उम्र सबसे अधिक जीवन में है।
नौ महीने कोख का सुख देती है एक उपहार यहाँ।।

जरा-सी चोट लगे बेटे को तो माँ परेशान हो जाए।
हर पल सावधानी का करती दिल में इख्तियार यहाँ।।

बस में अगर हो माँ के,स्वर्ग का ताज पहनादे माँ।
सब खुशियों की बेटे पर करना चाहती बौछार यहाँ।।

"प्रीतम"कर पूजा माँ की,ले माँ से सब संस्कार तू।
माँ की मूरत भगवान की सूरत गुणों की भरमार यहाँ।।
***************
***************
राधेयश्याम….बंगालिया….प्रीतम….कृत
प्रवक्ता हिन्दी
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय
किरावड (भिवानी)

बेहतरीन साहित्यिक पुस्तकें सिर्फ आपके लिए- यहाँ क्लिक करें

Views 42
इस पेज का लिंक-
Sponsored
Recommended
Author
Radhey shyam Pritam
Posts 118
Total Views 4.4k

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia