गजल : बुलबुल छेड तराना कोई

Radhey shyam Pritam

रचनाकार- Radhey shyam Pritam

विधा- गज़ल/गीतिका

बुलबुल छेड तराना कोई।
मैं भी लिखूँ अफसाना कोई।।

इतना सुहाना मौसम आया।
कैसे न हो जाए दीवाना कोई।।

फूलों ने खिल हँसना सिखाया।
है बहारों जैसे नजराना कोई।।

रोशन हो गए दीप दीवारों पर।
शम्मा में जला परवाना कोई।।

कूकी हैं कोयलें कदम पर बैठ।
आया जैसे सावन सुहाना कोई।।

कदम -आहट सुन चौंकी गौरी।
दरवाज़े पर आया दीवाना कोई।।

"प्रीतम"आज मैं हूँ खुश बहुत।
भूलकर दर्दे-दिल पुराना कोई।।

राधेश्याम बंगालिया "प्रीतम" कृत
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