गजल : बादल दीवाना हो गया

Radhey shyam Pritam

रचनाकार- Radhey shyam Pritam

विधा- गज़ल/गीतिका

धरती की बेचैनी देखी,मानसून का आना हो गया।
छमछमाछम बरसा ऐसे,बादल दीवाना हो गया।।

प्रेम की बूँदें गिरी जो,धरती का दिल भी डोल गया। बिखरी रूप की हरियाली,सारा जग नजराना हो गया।।

तन की शोभा,मन की शोभा,प्रेम से फूले-फले।
जिसके हृदय प्रेम फला,हरदिन सुहाना हो गया।।

विरहाग्नि बुझ गई तन लागी,प्रेम-दीपक जला।
ऐसा फैला प्रेम-उजाला,रोशन जमाना हो गया।।

पेडों से लिपटकर बैलें,प्रेम का खेल हैं खेलें।
फूलों से लद्द गई दीवानी,मौसम मस्ताना हो गया।।

आपको आना था यहाँ,हमको भी आना था यहाँ।
आज आए हम आए,मुलाकात का बहाना हो गया।।

ऐसी क्या खता हुई हमसे,आप क्यों आए नहीं।
ज्येष्ठ बीता,अषाढ बीता,सावन का आना हो गया।।

आप जो गुजरे चमन से,फूलों में रंग आ गए।
देखकर रंग फूलों का,भ्रमर दीवाना हो गया।।

बादल बन बरसा यादें,"प्रीतम"प्रिया के आँगन।
मन की हलचल कहे झूम,दिल दीवाना हो गया।।
राधेश्याम "प्रीतम" कृत रचना
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Radhey shyam Pritam
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