गजल : बात पते की

Radhey shyam Pritam

रचनाकार- Radhey shyam Pritam

विधा- गज़ल/गीतिका

हर चीज की कीमत यहाँ,क्यों दुनिया भूल जाती है।
बंद पडी घडी भी,दिन में सही दो समय बताती है।।

कमियां निकाले जो,उसकी मिशाल मख्खी-सी दूँगा।
खूबसूरत जिस्म को छोड,जो जख्म पर बैठ जाती है।।

पास में हो चीज हमारे,उसकी कदर नहीं करते हम।
दूर जाने पर पर दोस्तों,उसकी कीमत समझ आती है।।

संघर्ष में जिसने साथ दिया,सच्चा मीत वही जीवन में।
कामयाबी मिलने पर तो,सारी दुनिया साथ हो जाती है।।

सही नजर से देखोगे तो,दुनिया हसीन नजर आएगी।
भीगी पलकों से तो,आइने की सूरत धुंधली हो जाती है।।

बोल बडे कभी न बोलो,समय की लाठी ताकतवर है।
जिसदिन पड गयी ये,खुद से नफरत हो जाती है।।

चारदिन की है ये जिंदगी,हँसकर गुजारो मेरे दोस्तों।
घुट-घुट कर जीने से तो,ये नरक-सी हो जाती है।।

भेदभाव की दीवारों में,इंसानियत को न बंद करो तुम।
इन कर्मों को देखकर तो,कुदरत भी रूठ जाती है।।

हर रात के बाद मेरे दोस्तों,सुबह भी तो होती है।
गम से न हारो कभी,पीछे खुशियों की बारात आती है।।

"प्रीतम"तेरे विचार गजब है,काश!दुनिया के भी हो जाएं।
ऐसे पावन विचारों में तो,दुनिया स्वर्ग नजर आती है।।

दुनिया से लिए कुछ विचारों को मैंने तो केवल कलमबद्ध करने का तुच्छ-सा प्रयास किया है।
आप पाठक वर्ग को प्रयास अच्छा लगे तो टिप्पणी अवश्य करना।

आपका हितैषी–राधेश्याम "प्रीतम"
**********************
**********************

Views 67
Sponsored
Author
Radhey shyam Pritam
Posts 92
Total Views 3.2k
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia