💝💝◆ प्रीत का झूला◆💝💝

Radhey shyam Pritam

रचनाकार- Radhey shyam Pritam

विधा- कविता

हुश्नो-शबाब से दिल मेरा,वो चुराके चली गई।
अपनी मीठी बातों से,वो बहलाके चली गई।।

फुरसत में तराशा हुआ पूरनूर बदन कसम से।
लता-सी बलखाके दिल वो लिपटाके चली गई।।

पास आकर यूँ बैठना,जैसे खुदा मिला हो मुझे।
अपने प्यार के रंग में इतना,वो डुबाके चली गई।।

वो खिलखिलाकर हँसना,मचलकर बातें करना।
जालिम अंदाजे-वफा से,वो लुभाके चली गई।।

हम सौ-जान से मरने लगे,क्या ख्याल है आपका।
मेरे इस सवाल पर बस,वो मुस्कराके चली गई।।

मैंने पूछा ए-चाँद कहाँ से पाया ये रूप सलौना।
सुनकर यह मेरे पास से,वो शरमाके चली गई।।

दाँतों तले दबाके दुपट्टा,वो शरमाके बातें करना।
इसी कमसिन अदा से,वो दिल उडाके चली गई।।

तिरछी नजर से देखा उसने दाँतों तले दबा ऊँगली।
फिर चाँद-सी हँसी,वो इश्के-फूल बरसाके चली गई।।

यूँ तन्हा गुमसुम कहाँ खोया है आज यार मेरे।
"प्रीतम"प्रीत का झूला तुझे,वो झुलाके चली गई।।

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