गजल : दिल कहता है………👌👌👌

Radhey shyam Pritam

रचनाकार- Radhey shyam Pritam

विधा- गज़ल/गीतिका

मेरे ख्वाबों,ख्यालों में तेरी यादों का सजना है।
ये प्यार नहीं तो क्या है?लोगों का कहना है।।

करवट बदल-बदलकर तन्हाई में रातें गुजरती है।
तकिए को लगाकर सीने से अब आहें भरना है।।

तुमसे कहे कोई कुछ मुझसे सहन नहीं होता ये।
एक आग-सी लगती है दिल में और बहकना है।।

पंख न हों तो बोलो!एक परिंदा कैसे उड पाएगा।
होकर परेशान खुद से फिर तो रोना चिल्लाना है।।

कैसे कहूँ वो बातें दिल में उठती हैं जो लहर-सी।
सब्र नहीं होता मुझसे मगर एक राज छिपाना है।।

नाराज न हो जाए कहीं तू ये डर भी सताता है।
दिल टूट गया बयांकर तो जीवनभर पछताना है।।

फूल की खुश्बू कभी छुपाए नहीं छुपती जानता हूँ।
छिपाने की साजिस में तो झूठ का दाग लगना है।।

भला करे सबका मालिक नेक रस्ते पर लेता चले।
देकर बददुवाएं जो जलाना और खुद भी जलना है।।

दिल कहता है"प्रीतम"किस बात से डरता है तू।
छिपाकर हाले-दिल अपना कौनसा शकून पाना है।।

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राधेयश्याम….बंगालिया….प्रीतम….कृत
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Radhey shyam Pritam
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