💝💝◆कमसिन उम्र है◆💝💝

Radhey shyam Pritam

रचनाकार- Radhey shyam Pritam

विधा- कविता

कमसिन उम्र है इतना मुस्कराया न करो।
जुल्फें छत पर जाकर सुलझाया न करो।।

पडोसियों की नजरें अच्छी नहीं समझो।
इतना विश्वास किसी पर जताया न करो।।

हम तो हितैषी हैं जरा विश्वास तुम करो।
शक की नजर हमें तुम लखाया न करो।।

होठों की बिजलियां कडकती हैं जब भी।
दुपट्टे की ओट में तुम छिप जाया न करो।।

इश्क की आग जलाके कलेजा रख देती है।
मेरी सलाह को कभी तुम ठुकराया न करो।।

जवानी का उफान दूध-सा होता है सुनिए।
शब्र का जल तुम इससे बचाया न करो।।

"प्रीतम"दिल की लगी दिल्लगी होती है यार।
इसे प्यार की गिरफत में तुम लाया न करो।।

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👌👌👌***आर.एस.बी.प्रीतम👌👌👌

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