गगन में टूटता तारा दिखा है

Dr Archana Gupta

रचनाकार- Dr Archana Gupta

विधा- गज़ल/गीतिका

गगन में टूटता तारा दिखा है
किसी की आस का दीपक जला है

महक कर नाचता ये डालियों पर
हवा ने फूल से क्या कह दिया है

लगा है नाचने अब मोर मन का
घिरी फिर सावनी देखो घटा है

बदलता वक़्त रहता चाल अपनी
तभी तो ज़िन्दगी कहते जुआ है

चला जाता अमावस सौंप इसको
हमेशा चाँद ही कब रात का है

गया है टूट इतना 'अर्चना' दिल
कि लेना साँस भी लगती सजा है

डॉ अर्चना गुप्ता

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Dr Archana Gupta
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Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।

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2 comments
  1. लगा है नाचने अब मोर मन का
    घिरी फिर सावनी देखो घटा है ……सुंदर.
    आदरणीया डॉ.अर्चना गुप्ता जी सादर, अच्छी गजल कही है. बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें.

    महक कर नाचता ये डालियों पर
    हवा ने फूल से क्या कह दिया है………….तनाफुर के एब को देख लें.

    गया है टूट इतना ‘अर्चना’ दिल
    कि लेना साँस भी लगती सजा है …….लगती या लगता देख लें. सादर.

  2. हमेशा ही चाँद कब रात का है !!
    वाह वाह्ह्ह्ह् वाहह, कमाल का लिखा है