गंगा महिमा

लक्ष्मी सिंह

रचनाकार- लक्ष्मी सिंह

विधा- हाइकु

(1)🌼गंगा महिमा
भारत की गरिमा
जाने दुनिया 🌼

(2)🌼स्वर्ग की नदी
धरा पर उतरी
ब्रह्मा की पुत्री🌼

(3)🌼भीष्म की माता
निर्मल जलधारा
अतिविशाला🌼

(4)🌼पवित्र नदी
प्रथम पूज्य देवी
सदैव रही🌼

(5)🌼वेदों की साक्षी
देवों में भी पूजित
देती है मुक्ति🌼

(6)🌼उद्गम स्थल
गंगोत्री हिमनद
मिली सागर🌼

(7)🌼श्वेतमयी सी
शंकर की जटा में
रहनेवाली 🌼

(8)🌼भागीरथ ने
धरा पर उतारा
घोर तप से🌼

(9)🌼अति वेग से
उछलती कुदती
धरा पे आई🌼

(10)🌼सदा चलती
कभी ना थकती
ना ठहरती🌼

(11)🌼गंगा की धारा
तीनों लोकों में जाती
सदा वंदित🌼

(12)🌼गंगा जीवन
अमृत सा पावन
शुद्ध शीतल🌼

(13)🌼माँ दुलारती
मुर्दा भी तारती
शुभ आरती 🌼

(14)🌼कल्याणमयी
विशाल भू सिंचती
जीवन देती🌼

(15)🌼मुक्ति का द्वार
सांस्कृतिक आधार
रीति संस्कार🌼

(16)🌼गंगा में स्नान
सारे पापों का नाश
पुण्य की प्राप्ति🌼

(17)🌼गंगा किनारे
अनेक तीर्थ स्थल
भव्य दर्शन🌼

(18)🌼प्यास बुझाती
जीव जन्तु पालती
माँ कहलाती🌼

(19)🌼गंगा का पानी
कभी सड़ता नहीं
विशेष शक्ति🌼

(20)🌼औषधि गुण
रोग प्रतिरोधक
शक्ति वर्धक🌼

(21)🌼देश की आत्मा
जन-जन की मैया
ममता भरा🌼

(22)🌼वैभवशाली
अति गौरवशाली
अध्यात्ममयी🌼

(23)🌼गंगा दूषित
बड़ी दुख की बात
करो उपाय🌼
🌼🌸🌼—लक्ष्मी सिंह💓😊

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लक्ष्मी सिंह
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