ख़्वाब आँखों में सजाना चाहिए

बबीता अग्रवाल #कँवल

रचनाकार- बबीता अग्रवाल #कँवल

विधा- गज़ल/गीतिका

ख्वाब आँखों में सजाना चाहिए
हसरतों को पर लगाना चाहिए

रास मुझकोे आएं कैसे ये खुशी
ज़ख़्म कोई फिर पुराना चाहिए

दर्द दिल में तो सभी के हैं मगर
ग़म को रोने का बहाना चाहिए

तोड़ कर नफ़रत भरी दीवार को
प्यार का सुर्ख रंग लगाना चाहिए

जिंदगी मिलती बड़ी मुश्किल से है
हार कर न इसे गँवाना चाहिए

काम कोई है नहीं करना मगर
आपको तो बस बहाना चाहिए

दिल कँवल का तोड़ते हो तोड़ दो
फिर न कहना मुस्कुराना चाहिए

बबीता अग्रवाल #कँवल

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जन्मस्थान - सिक्किम फिलहाल - सिलीगुड़ी ( पश्चिम बंगाल ) दैनिक पत्रिका, और सांझा काव्य पत्रिका में रचनायें छपती रहती हैं। (तालीम तो हासिल नहीं है पर जो भी लिखती हूँ, दिल से लिखती हूँ)

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