ख्वाब शशि के

विजय कुमार नामदेव

रचनाकार- विजय कुमार नामदेव

विधा- गज़ल/गीतिका

बेशर्म की कलम से

ख्वाब शशि के

कहने को अपवाद रहा हूँ।
पर आंसू सा रोज बहा हूँ।।

अंधियारी जीवन रजनी में।
ख्वाब शशि के देख रहा हूँ।।

कितनी बार मिटाया खुद को।
पूछ ना कितनी बार ढहा हूँ।।

रहा अनसुना यूँ जीवन भर।
गया मैं कितनी बार कहा हूँ।।

दुनिया समझे मुझे "बेशरम"।
हर नहले पर पड़ा दहा हूँ।।

विजय बेशर्म
गाडरवारा 9424750038

Views 54
Sponsored
Author
विजय कुमार नामदेव
Posts 19
Total Views 7.8k
सम्प्रति-अध्यापक शासकीय हाई स्कूल खैरुआ प्रकाशित कृतियां- गधा परेशान है, तृप्ति के तिनके, ख्वाब शशि के, मेरी तुम संपर्क- प्रतिभा कॉलोनी गाडरवारा मप्र चलित वार्ता- 09424750038
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia