“ख्वाब “(प्रतीकात्मक मुक्तक)

ramprasad lilhare

रचनाकार- ramprasad lilhare

विधा- मुक्तक

"ख्वाब"
(प्रतीकात्मक मुक्तक)

रात रूपी बगीची में
ख्वाब रूपी फूल खिले
नींद रूपी जल को पाकर
फूल खूब फले फूले
सुबह रूपी ताप पाकर
नींद रूपी जल सुख गया
नींद रूपी जल सुख गया तब
ख्वाब रूपी फूल टूट गया।

रामप्रसाद लिल्हारे
"मीना "

Views 3
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
ramprasad lilhare
Posts 37
Total Views 926
रामप्रसाद लिल्हारे "मीना "चिखला तहसील किरनापुर जिला बालाघाट म.प्र। हास्य व्यंग्य कवि पसंदीदा छंद -दोहा, कुण्डलियाँ सभी प्रकार की कविता, शेर, हास्य व्यंग्य लिखना पसंद वर्तमान में शास उच्च माध्यमिक विद्यालय माटे किरनापुर में शिक्षक के पद पर कार्यरत। शिक्षा एम. ए हिन्दी साहित्य नेट उत्तीर्ण हिन्दी साहित्य। डी. एड। जन्म तिथि 21-04 -1985 मेरी दो कविता "आवाज़ "और "जनाबेआली " पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई है।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia