खोजूं सत्य चरित्त

RAMESH SHARMA

रचनाकार- RAMESH SHARMA

विधा- दोहे

हुआ सुदामा सा कभी,,कब किसका सत्कार!
कान्हा जैसा दूसरा,…..हुआ नही फिर यार!!

बना सुदामा मैं प्रभो,……खोजूं सत्य चरित्र !
कलियुग में भी श्याम सा, सीधा सच्चा मित्र !!

देख सुदामा मीत को , नजरे फेरें श्याम !
बदल गये इस दौर में ,यारी के आयाम !!
रमेश शर्मा.

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RAMESH SHARMA
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अपने जीवन काल में, करो काम ये नेक ! जन्मदिवस पर स्वयं के,वृक्ष लगाओ एक !! रमेश शर्मा

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