“खूबसूरत जिन्दगी “

Dr.Nidhi Srivastava

रचनाकार- Dr.Nidhi Srivastava

विधा- कविता

ख्वाहिशों के पन्ने ना पलटिये ,
सिलवटें पड़ जाती हैं ,
और उम्र गुज़र जाती है ,
मगर पूरी नहीं होती हैं ,
यादों को भी समेट दीजिये,
इन्हीं पन्नों के बीच,
परत -दर -परत,
मिलती है बडी मुश्किल से,
छोटी सी ये खूबसूरत ज़िंदगी ,
हौसलों के पंख पसारिये,
अपने आज पे न्योंछावर,
अपने कल को कर दीजिये,
अपने आने वाले कल को
अपनी आगोश में भर लीजिये.
…निधि…

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"हूँ सरल ,किंतु सरल नहीं जान लेना मुझको, हूँ एक धारा-अविरल,किंतु रोक लेना मुझको"

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