” ——————————————खुशियां समेटे थे” !!

Bhagwati prasad Vyas

रचनाकार- Bhagwati prasad Vyas " neerad "

विधा- गज़ल/गीतिका

ये जो बोल बिखरें हैं , बरसों से समेटे थे !
नाग की तरह ये तो , कुंडली मारे बैठे थे !!

टूटा है भरम सबका , जान गए गहराई!
दुशाले में ये अपना , मुंह जो लपेटे थे !!

पदक यहां आसां नहीं , पद मिल ही जाते हैं !
सफलता के दामन में , खुशियां समेटे थे !!

विरासत में जो भी मिला , छिप नहीं पाता है !
गरिमा चढ़ा भेंट दी , सफलता पे ऐंठे थे !!

उम्मीदों पे उतरें खरे , पलकों पे बैठगें !
गिरे अर्श से फर्श पर , किस्मत लपेटे थे !!

सबके हैं दिन फिरते , कल की खबर किसको !
आज बेदखल हो गए , कुर्सियों पे बैठे थे !!

बृज व्यास

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Bhagwati prasad Vyas
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एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में रचनाओं का प्रकाशन ! एक लम्हा जिन्दगी , रूह की आवाज , खनक आखर की एवं कश्ती में चाँद साझा काव्य संग्रह प्रकाशित ! e काव्यसंग्रह "कहीं धूप कहीं छाँव" एवं "दस्तक समय की " प्रकाशित !

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