खामोश अकसर जब भी मैं रहता हूँ

kamni Gupta

रचनाकार- kamni Gupta

विधा- गज़ल/गीतिका

खामोश अकसर जब भी मैं रहता हूँ।
तुम समझते हो मैं चुप ही रहता हूँ।

हर बार शब्दों का शोर नहीं मुमकिन
इसलिए कभी यूं आँखों से भी कहता हूँ।

ख्वाबों की मलकियत है यूं तो मेरे पास
हकीकत में माना कि तन्हां ही रहता हूँ।

तुम भी न समझे तो कौन अब समझेगा
मैं अपना तुम्हें बस तुम्हें ही समझता हूँ।।।
कामनी गुप्ता ***

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I am kamni gupta from jammu . writing is my hobby. Sanjha sangreh.... Sahodri sopan-2 Deepshikha Satyam prabhat Mehkte lafz.

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