ख़ाक में मुझको मिलाने आ गए

बबीता अग्रवाल #कँवल

रचनाकार- बबीता अग्रवाल #कँवल

विधा- गज़ल/गीतिका

जिंदगी भर जह्र पिलाने आ गये
ख़ाक में मुझको मिलाने आ गये

जी रहे थे हम यहाँ ओ.. बेवफ़ा
क्यों हमें फिर से सताने आ गये

दूर हमसे हो गये थे बेवजह
फासले अब क्यों मिटाने आ गये

रात की रंगीनियों में खो गये
दिल मिरा देखो जलाने आ गये

मुश्किलों से हो गया जो सामना
दर खुदा के सर झुकाने आ गये

हो गई तुझसे मुहब्बत है कँवल
आज ये तुझको बताने आ गये

गिरहबंद-
चाँद छूने के बहाने आ गए
हम भी क़िस्मत आज़माने आ गए

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जन्मस्थान - सिक्किम फिलहाल - सिलीगुड़ी ( पश्चिम बंगाल ) दैनिक पत्रिका, और सांझा काव्य पत्रिका में रचनायें छपती रहती हैं। (तालीम तो हासिल नहीं है पर जो भी लिखती हूँ, दिल से लिखती हूँ)

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