कड़वी सच्चाई लिखूँगी

डॉ सुलक्षणा अहलावत

रचनाकार- डॉ सुलक्षणा अहलावत

विधा- गज़ल/गीतिका

गरीब की आह लिखूँगी, अमीर की चाह लिखूँगी,
आम जनता के लिये राजनेता हैं बेपरवाह लिखूँगी।

गरीब का दर्द लिखूँगी, वासना में डूबा मर्द लिखूँगी,
मर्यादा छोड़ दी औरत ने, मची है अँधेरगर्द लिखूँगी।

बिकता है बदन लिखूँगी, अमीरी में नंगा तन लिखूँगी,
देश का भविष्य गंवा रहा सड़को पर बचपन लिखूँगी।

किसान की बदहाली लिखूँगी, हालत माली लिखूँगी,
देश के रक्षकों को मिलती गोली और गाली लिखूँगी।

मजहब की लड़ाई लिखूँगी, कड़वी सच्चाई लिखूँगी,
अमीर गरीब में दिन प्रति दिन बढ़ रही खाई लिखूँगी।

पेट की आग लिखूँगी, मानवता पर लगते दाग लिखूँगी,
आज सुलक्षणा के लेखन से जनता रही है जाग लिखूँगी।

©® डॉ सुलक्षणा अहलावत

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डॉ सुलक्षणा अहलावत
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लिख सकूँ कुछ ऐसा जो दिल को छू जाये, मेरे हर शब्द से मोहब्बत की खुशबु आये। शिक्षा विभाग हरियाणा सरकार में अंग्रेजी प्रवक्ता के पद पर कार्यरत हूँ। हरियाणवी लोक गायक श्री रणबीर सिंह बड़वासनी मेरे गुरु हैं। माँ सरस्वती की दयादृष्टि से लेखन में गहन रूचि है।

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