झाँसी की रानी /क्षिति पर तूफाँ-सा आया ,तलवार हाथ ले निकल पड़ी

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बृजेश कुमार नायक

रचनाकार- बृजेश कुमार नायक

विधा- कविता

क्षिति पर तूफाँ-सा आया,तलवार हाथ ले निकल पड़ी|
देख फिरंगी की छाती पर, अश्व-टाप धर आज चढी|

सुयश-वीरता खेल खेलती,झाँसी की क्षत्राणी थी
मातृभूमि की जय,जय रानी,बुंदेलों की वाणी थी
अद्भुत तेज,अपार वीर रस, रोम-रोम पर झलक रहा
फँस गया फिरंगी फंदे में मर गया, बचा तो बिलख रहा
देखो विप्लव के कारण, बैरी की सेना, पिछल पड़ी
देख फिरंगी की छाती पर अश्व-टाप धर आज चढी |
क्षिति पर तूफाँ-सा आया तलवार हाथ ले निकल पड़ी |
देख फिरंगी की छाती पर अश्व-टाप धर आज चढी |

दत्तक, पृष्ठ भाग पर कस,उत्तर दिश को बढती जाती
निकट कालपी, सेना देखी,अश्व गिरा तब घबड़ाती
रानी नीचे, कांटों से छिद गया सुतन, था हाल बुरा
देख सुअवसर अश्व लिया, छलकी आँखें ना देर जरा
सच कहूँ समय न था तुरंत ,कालपी त्यागी,विकल घड़ी
देख फिरंगी की छाती पर अश्व-टाप धर आज चढी
क्षिति पर तूफाँ-सा आया तलवार हाथ ले निकल पड़ी
देख फिरंगी की छाती पर अश्व-टाप धर आज चढी

आगे बढ़ ,डाकू बरजोरा आया ,औ ललकार उठा
सीमा के अंदर देखा तो निर्दयी कुसिंह दहाड़ उठा
रानी बोली भारतीय क्षत्राणी हूँ, न भेड़ हूँ मैं
तेरी गर्जन से डरूँ न हट, वरना तुझे उधेड़ दूँ मैं
नारी को आँखें दिखलाता, लगता तेरी अकल सड़ी
देख फिरंगी की छाती पर अश्व-टाप धर आज चढी
क्षिति पर तूफाँ-सा आया तलवार हाथ ले निकल पड़ी
देख फिरंगी की छाती पर अश्व-टाप धर आज चढी

पीछे गोरों की सेना के, प्यादे आने वाले हैं
लज्जा खाओ, देश हेतु हम मर-मिट जाने बाले हैं
बरजोरा पानी-पानी हो, बोला, जाओ लड़ता हूँ
गोरी सेना के सम्मुख,स्व छाती खोल के अड़ता हूँ
रानीलक्ष्मीबाई निकली,राष्ट्र-चेतना सबल पड़ी
देख फिरंगी की छाती पर अश्व-टाप धर आज चढी
क्षिति पर तूफाँ-सा आया तलवार हाथ ले निकल पड़ी
देख फिरंगी की छाती पर अश्व-टाप धर आज चढी

बरजोरा ने युद्ध लड़ा, छक्के छूटे शासन के
रोते-चिल्लाते गोरे, हिल गए पैर अनुशासन के
सेना आई तत्क्षण घेरा, वीर कहे, जय हिंद देश
तलवार मार ली निज तन में, जय भारत,जय जय स्वदेश
झाँसी -रानी बच जाए, मैं मरूं न दुख ,तब सफल घड़ी
देख फिरंगी की छाती पर अश्व-टाप धर आज चढी
क्षिति पर तूफाँ-सा आया तलवार हाथ ले निकल पड़ी
देख फिरंगी की छाती पर अश्व-टाप धर आज चढी

राम लला मंदिर-फाटक पर ,लक्ष्मीबाई खड़ी हुई
कोंच नगर अति धन्य हुआ, शुभ जयकारों की झड़ी हुई
तब तक गोरों की सेना ने, कोंच -किनारा घेर लिया
हुआ भयंकर युद्ध, जवानों ने, उन सबको ढेर किया
यह क्या ,सेना पुनि से आई, शत्रु-चाल कुछ सबल पड़ी
देख फिरंगी की छाती पर अश्व-टाप धर आज चढी
क्षिति पर तूफाँ-सा आया तलवार हाथ ले निकल पड़ी
देख फिरंगी की छाती पर अश्व-टाप धर आज चढी

झाँसी -रानी निकल पड़ी, अविरल खूनी संग्राम हुआ
मारा,काटा,रूँदा,घेरा,बैरी डर -आयाम हुआ
रानी ने शौर्य दिखाया तो,गूँज गया विजयी निनाद
तात्या का शुभ संग मिला, हो गया जीत का शंखनाद
फिर इक किला, ग्वालियर का भी,जीता,यह उपलब्धि बड़ी
देख फिरंगी की छाती पर अश्व-टाप धर आज चढी
क्षिति पर तूफाँ-सा आया तलवार हाथ ले निकल पड़ी
देख फिरंगी की छाती पर अश्व-टाप धर आज चढी

जून ,अठारह सौ अट्ठावन, घेर लिया पुनि रानी को
कोटा की सराई, ग्वालियर,फूलवाग में प्राणी को
मिली वीरगति, अश्रु आ गए ,रामचंद्र रो रहाआज
यह चर्चा आग-सदृश फैली, रोता भारत का समाज
मातृ-सुतल को कर प्रणाम,सुर लोक गई,अति विकल घड़ी
देख फिरंगी की छाती पर अश्व-टाप धर आज चढी
क्षिति पर तूफाँ-सा आया,तलवार हाथ ले निकल पड़ी
देख फिरंगी की छाती पर अश्व-टाप धर आज चढी …………………………………………………..
कोटा की सराई=ग्वालियर का फूलवाग क्षेत्र
रामचंद्र =श्री राम चंद्र राव ,रानी लक्ष्मीबाई का अंग रक्षक|
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बृजेश कुमार नायक
"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" कृतियों के प्रणेता
. सूचना
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1=वर्ष 2013 में जे एम डी पब्लिकेशन नई दिल्ली से प्रकाशित मेरी कृति "जागा हिंदुस्तान चाहिए" ISBN: 978-93-82340-13-3 की रचना को परिष्कृत कर साहित्य पीडिया पर प्रकाशित किया गया है |उक्त रचना के अनुसार पाठक बंधु कृति की रचना को परिष्कृत कर सकते हैं |

2=इस रचना को मेरी फेस बुक " Brijesh Nayak" पर भी पढा जा सकता है या फेसबुक पर "झाँसी की रानी " सर्च कर मेरी उक्त रचना को पढा जा सकता है| फेस बुक पर प्रकाशित मेरी रचना "झाँसी की रानी " के अनुसार भी पाठक बंधु उक्त रचना को परिष्कृत कर सकते हैं|

3=मेरे (बृजेश कुमार नायक के) फेसबुक पेज
"बृजेश कुमार नायक की रचनाएं" में भी उक्त रचना,को पढा जा सकता है|

बृजेश कुमार नायक
"जागा हिंदुस्तान चाहिए"एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" कृतियों के प्रणेता
16-08-2017

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बृजेश कुमार नायक
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एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा जन्मतिथि-08-05-1961 प्रकाशित कृतियाँ-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" साक्षात्कार,युद्धरतआमआदमी सहित देश की कई प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेक सम्मानों एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित, जन्म स्थान-कैथेरी,जालौन निवास-सुभाष नगर, कोंच,जालौन,उ.प्र.-285205 मो-9455423376व्हाट्सआप-9956928367 एवं8787045243

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