क्षणिक आपदा

पं.संजीव शुक्ल

रचनाकार- पं.संजीव शुक्ल "सचिन"

विधा- शेर

बाढ़ आई है , आने दो, सुनामी थोड़ी है
ये क्षणिक आपदा है , प्रलय थोड़ी है
जब वक्त आयेगा कुछ बांट देंगे राहत के नाम हम भी,
अभी सरकार के पास फिजूल वक्त थोड़ी हैं।
पं.संजीव शुक्ल "सचिन"

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पं.संजीव शुक्ल
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मैं पश्चिमी चम्पारण से हूँ, ग्राम+पो.-मुसहरवा (बिहार) वर्तमान समय में दिल्ली में एक प्राईवेट सेक्टर में कार्यरत हूँ। लेखन कला मेरा जूनून है।

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