क्षणभंगुर …

sushil sarna

रचनाकार- sushil sarna

विधा- मुक्तक

क्षणभंगुर …

क्षणभंगुर इस जीवन का कहाँ कोई ठिकाना है l
हर कदम पे उलझन में लिपटा एक फ़साना है l
हो सका न मुक्त कभी आदि , अंत की कैद से ,
आना-जाना साँसों का इस तन में एक बहाना हैll

सुशील सरना

Views 5
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
sushil sarna
Posts 52
Total Views 308
I,sushil sarna, resident of Jaipur , I am very simple,emotional,transparent and of-course poetry loving person. Passion of poetry., Hamsafar, Paavni,Akshron ke ot se, Shubhastu are my/joint poetry books.Poetry is my passionrn

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia