क्यो बेटी मारी जाती है

कृष्णकांत गुर्जर

रचनाकार- कृष्णकांत गुर्जर

विधा- कविता

हे माँ बतला इक बात मुझे,क्यो बेटी मारी जाती है|
कल माँ भी तो बेटी थी माँ ,फिर क्यो जिंदा रह जाती है||
बेदो मे और कुरानो मे,क्यो बेटी पूँजी जाती है|
सतद्वापर त्रैत्रा कलयुग मे माँ,बेटी ही श्रृष्टि रचाती है||
क्यो भूल रही गाथा उनकी, जिन्हे दुनिया शीश झुकाती है|
नौ देवी जग जननी मैया, कन्या का रूप कहाती है||
सीता रानी लक्ष्मी भी तो,क्यो जग जननी कहलाती है|
राधा मीरा की विरह कथा,लता की तान सुनाती है||
बस बात मुझे बतलादे तू, क्यो बेटी को मारी जाती है|
लानत है माँ की ममता पर,क्यो अपनी माँ को लजाती है||
मे बेटी हूँ मेरा दोष है क्या, क्यो दिल मे आग लगाती है|
माँ क्यो ममता के आँचल मे,बेटे को तू यूँ सुलाती है||
बेटा गर पानी देगा तो,बेटी भी बंश चलाती है|
बेटा तो कुल को चलाता है,बेटी दो कुल को चलाती है||
मेरी बात मान ले माँ प्यारी ,तू दिल को दुखलाती है|
बेटी भी पढ लिख कर माँ सुन, दुनिया मे नाम कमाती है||
हे माँ बतला इक वात मुझे,क्यो बेटी मारी जाती है|
बेटी तो बेटी होती है,वो भी माँ सपने सजाती

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कृष्णकांत गुर्जर
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