क्योंकि मैं एक नारी हूँ

लोधी डॉ. आशा 'अदिति'

रचनाकार- लोधी डॉ. आशा 'अदिति'

विधा- कविता

कुछ लोग कहते हैं मैं ऐसी हूँ
कुछ कहते हैं मैं वैसी हूँ

कुछ ये भी बातें करते हैं कि
मैं कैसी दिखती हूँ, कैसे हँसती हूँ
मैं क्या पहनती हूँ, कैसे बातें करती हूँ

और तो और
कुछ लोग तो ये भी बातें बनाते हैं कि
मैं किससे मिलती हूँ, कहाँ कहाँ जाती हूँ

कभी कभी मुझे बड़ी जोर की
हँसी भी आती है उन लोगों पर
और उनकी बेसिर पैर की बातों पर

जो लोग मुझसे एक भी बार नहीं मिले
मुझे देखा भी नहीं
मुझे जानते नहीं, मुझे पहचानते नहीं
उन्हें कैसे पता चला कि मैं कैसी हूँ?

कभी कभी मैं ये भी सोचती हूँ
क्या उन लोगों के पास इतना व्यर्थ का समय है
कि किसी के बारे में कुछ भी कहते रहते हैं

क्यों नहीं झांकते वो लोग
खुद के अंदर, खुद के मन में
क्यूँ नहीं दिखती उन्हें
खुद के अंदर की, अपने मन के
कोने कोने में छिपी एक स्त्री के लिए गन्दगी

यूँ ही सोचते सोचते
फिर ये भी विचार आता है
कि शायद मैं सबसे अलग हूँ
कुछ ऐसी जैसा कोई नहीं

और वो सभी लोग
जो मेरे बारे में अनर्गल बातें करते हैं
उन्हें मैं वैसी ही लगती हूँ
जैसा उनका मन
मेरे बारे में सोचता रहता है
जैसा उनका मन
मुझे देखना चाहता है

लोधी डॉ. आशा 'अदिति'
भोपाल

Views 127
Sponsored
Author
लोधी डॉ. आशा 'अदिति'
Posts 43
Total Views 6.1k
मध्यप्रदेश में सहायक संचालक के पद पर कार्यरत...आई आई टी रुड़की से पी एच डी की उपाधि प्राप्त...अपने आसपास जो देखती हूँ, जो महसूस करती हूँ उसे कलम के द्वारा अभिव्यक्त करने की कोशिश करती हूँ...पूर्व में 'अदिति कैलाश' उपनाम से भी विचारों की अभिव्यक्ति....
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia