क्योंकि मरना तुम्हारी हद हैं!

Neeraj Chauhan

रचनाकार- Neeraj Chauhan

विधा- कविता

आँखे फाड़
लक्ष्य को ताड़,
जिद पर अड़
दुःखों से लड़,
काटों पर चलना तुम्हारी ज़द हैं
क्योंकि मरना तुम्हारी हद है !

सुखों को छोड़
नाता दुखों से जोड़,
संघर्षो में ख़ुद को तपने दे
दिखा कुछ चिंगारी,
और धुंआ सा निकलने दे
अब आंसू नही, पसीना तुम्हारी नद है
क्योंकि मरना तुम्हारी हद है!

दुश्मनों की परवाह छोड़
खुद को लोहे से तपा
सरिये सा मरोड़
ईर्ष्या की छाती पर पैर
प्रेम की कर होड़
रुकता नही कभी , तुम्हारा आसमा सा कद है
क्योंकि मरना तुम्हारी हद है!

-© नीरज चौहान

Views 29
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Neeraj Chauhan
Posts 57
Total Views 5.6k
कॉर्पोरेट और हिंदी की जगज़ाहिर लड़ाई में एक छुपा हुआ लेखक हूँ। माँ हिंदी के प्रति मेरी गहरी निष्ठा हैं। जिसे आजीवन मैं निभाना चाहता हूँ।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia