क्यूँ हम वीरों की शहादत भूल जाते हैं?

आनंद बिहारी

रचनाकार- आनंद बिहारी

विधा- गज़ल/गीतिका

ग़ज़ल (23.09.2016)

हर बार उसकी नापाक, आदत भूल जाते है
क्यूँ हम अपने वीरों की,शहादत भूल जाते हैं?

घड़ी बस दो घड़ी कुर्बानियों को याद करते है
ज़िन्दा सैनिकों की, क्यों इबादत भूल जाते हैं?

अगर हम भूल जाएँगे करगिल फिर वो लाएँगे
वो आफ़त के पुड़िया,हम आफ़त भूल जाते है।

अक्सर भूल जाते है,क्यूँ कमजोर है याददास्त?
उनके साजिशों के,क्यूँ अदावत भूल जाते है??

कहीं मैंने नहीं देखा, कहीं क्या आपने देखा?
अपनी शान हाथी को, महावत भूल जाते है??

वो रोटी-दाल में परेशां, हम शौक़ में busy
हम में और भी जो है, महारत भूल जाते हैं।

©आनंद बिहारी, चंडीगढ़
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आनंद बिहारी
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गीत-ग़ज़लकार by Passion नाम: आनंद कुमार तिवारी सम्मान: विश्व हिंदी रचनाकार मंच से "काव्यश्री" सम्मान जन्म: 10 जुलाई 1976 को सारण (अब सिवान), बिहार में शिक्षा: B A (Hons), CAIIB (Financial Advising) लेखन विधा: गीत-गज़लें, Creative Writing etc प्रकाशन: रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित FB/Tweeter Page: @anandbiharilive Whatsapp: 9878115857
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10 comments
  1. Aapka lekhan man mastishk per vanchhit bhav jagrit karne mein saksham hai. Shally uttam evam Shabdon ka chayan sateek hai. Sadhuvaad.
    May Kanha Ji bless you.

  2. Aapka lekhan man mastishk per vanchhit bhav jagrit karne mein saksham hai. Shally uttam evam Shabdon ka chayan sateek hai. Sadhuvaad.
    May Kanha Ji bless you.