क्या उरई का नाम गिनीज बुक में दर्ज करा पाएंगे मच्छर ?

पारसमणि अग्रवाल

रचनाकार- पारसमणि अग्रवाल

विधा- लेख

क्या उरई का नाम गिनीज बुक में दर्ज करा पाएंगे मच्छर ? भले ही यह सवाल सुनकर आप हक्के बक्के रह गए हो और सवाल बेतुका लग रहा हो यह सवाल धरातल पर खड़ा होकर उरई के प्रशासन से होता दिखाई दे रहा है।
गोल गोल बातों में न घूमाकर सीधे मुद्दे की बात करता हूँ जिला मुख्यालय उरई के रेलवे स्टेशन पर प्रशासन की मेहरवानी से मच्छरों का इतना साम्राज्य हो गया है कि यदि किसी ने इस स्टेशन के प्लेटफार्म पर किन्हीं कारणों वश रात गुजारने का फ़ैसला ले लिया मुझे लगता है ये बहुत ही साहस और मजबूरी पूर्ण फैसला है क्योंकि यँहा मच्छरों का इतना आतंक है कि नींद आने की बात तो दूर आप चुपचाप नहीँ बैठ सकते बल्कि आप अपने हाथो को गति देते हुये जाने कितने मच्छरों को मौत के घाट सुला देते है और जाने कितने मच्छर आपके खून को अपना भोजन बनाते है और आख़िरकार सुबह होते होते वह यह कहने को मजबूर ही हो जाता है कि क्या उरई का नाम गिनीज बुक में लिखा पाएंगे मच्छर
प्रशासन के आशीर्वाद से बेख़ौफ़ मच्छर उरई स्टेशन पर आने जाने वाले यात्रियों के चर्चा का विषय बना हुआ है और इस नए सवाल को जन्म मिल रहा है कि आखिर कब चेतेगा प्रशासन या फिर यू ही मच्छरों का साम्राज्य रहेगा
खास बात तो यह है कि उरई में कुछ माह पूर्व तक मच्छरों के नाम पर एक चोराहा भी प्रसिद्ध है जिसे लोग प्यार से मच्छर चौराहा कहते है हालांकि अब इस चोराहे का नाम बदल कर भगत सिंह चौराहा कर दिया गया है। अब इस सवाल का जवाब तो वक्त ही दे पायेगा कि क्या उरई का नाम गिनीज बुक में लिखा पाएंगे मच्छर?

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